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पॉलिटिकल पावर प्ले, गहलोत – सचिन ने बदली रणनीति- हैमंत गौड़

हैमंत गौड़

राजस्थान कांग्रेस की अंतर्कलह भरपूर सिनेमेटिक होती जा रही है।
राजनीति के नये नये कलेवर में सजी ये अंतर्कलह पत्रकारों, राजनीतिज्ञों के अलावा आम जनमानस का ध्यान अपने से भटकने नही दे रही है।
संघर्ष की दास्तान सुनाकर सत्ता में भागीदारी की मांग कर रहे सचिन पायलट को लगातार कमजोर करने की रणनीति की चर्चा दिल्ली से लेकर जयपुर तक बड़े चटखारे लेकर सुनी – कही जा रही हैं।
भागेदारी में हो रही देरी का उल्हना और सुलह को बनाई कमेटी का थमाया झुनझुना लौटने दिल्ली गये पायलट को जादूगर की बिछाई बिसात पर कोई खास सफलता नही मिली।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इधर जादूगर ने पायलट को पूर्ण हाशिये पर धकेलने के लिए नयी रणनीति बनाते हुवे खुद को दो महीनों का राजनैतिक क्वारन्टीन दिया वही दूसरी और निर्दलीय व बसपा के कांग्रेसी विधायको को आगे करते हुवे नया मोर्चा खोल दिया कि जो लोग सत्ता को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे थे उन्हें मनाने के प्रयास किये जा रहे हैं और जिन्होंने सत्ता बचाने में सहयोग किया उन्हें नजर अंदाज किया जा रहा है।
बरहाल इस नये मोर्चे का तात्कालिक असर गहलोत के पक्ष में आलाकमान पर दिख भी रहा है।
बदली रणनीति से दिल्ली से बैरंग लौटे पायलट ने भी अब जवाब में अपनी रणनीति बदल ली है।
सड़को के संघर्ष से सत्ता में आये पायलट ने एक बार फिर सड़को का रुख कर लिया है।
आलाकमान से सुनवाई नही होने से आहत सचिन पायलट अब अपनी जमीनी ताकत का इस्तेमाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस आलाकमान पर दबाब बनाने के लिए करेंगे।
इसके लिए पायलट राजस्थान में कोरोना से जिनकी मौतें हुई हैं, उन परिवारों को सांत्वना देने उनके घर जाएंगे। इधर, समर्थक पोस्टर लगाकर उनके संघर्ष को सार्वजनिक करने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी सक्रियता बढाई गई है।
पायलट ने कोरोना मृतकों के परिजन से मिलने की शुरुआत रविवार से ही कर दी है। दौरे के पहले चरण में वह कांग्रेस पार्टी के उन विधायकों के घर जा रहे हैं, जिन्होंने अपनों को खोया है। दौरे की पहली प्राथमिकता गुर्जर मीणा बाहुल्य पूर्वी राजस्थान है, लेकिन पायलट खुद को यहां तक सीमिति नहीं करेंगे। उनकी पूरे राजस्थान में दौरे की योजना है। पायलट समर्थकों का दूसरा प्लान, फील्ड में जनसमस्याओं को लेकर दबाव और अफसरों की घेराबंदी का है।
सचिन पायलट समर्थक हर मोर्चे पर शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं। पायलट समर्थक दो दिनों से ही ट्विटर पर #पायलट आ रहा है। ट्ववीट कर रहे हैं। यह ट्विटर पर टॉप ट्रेंड पर चल रहा है। इस हैशटेग पर अब तक एक लाख से ज्यादा ट्वीट हो चुके हैं और इसकी संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है। समर्थक सचिन पायलट के समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं। इससे पहले कई पायलट समर्थक विधायक भी बयान दे चुके हैं कि पंजाब में नवजोत सिद्धू की 10 दिन में बात सुनी जा सकती है तो राजस्थान में सचिन पायलट की क्यों नहीं सुनी जा सकती।
सचिन पायलट को पोलेटिकली विक्टम के तौर पर प्रदर्शित करने के लिए राजधानी सहित अनेक स्थानों पर बड़े बड़े होर्डिंग्स लगाए जा रहे है।
राजधानी में पायलट समर्थकों ने उनके विपक्ष में रहते हुए पुलिस की लाठियां खाते हुए पोस्टर लगाकर पोस्टर वॉर की शुरूआत की है। पोस्टर वॉर के बीच ही साइबर वॉर भी शुरू किया है। ट्विटर ट्रेंड के जरिए पायलट समर्थकों ने सियासी हलकों में चर्चाएं छेड़ दी है।
इस पॉल्टिकली पॉवर प्ले में ताबड़तोड़ बैटिंग करने उतरे पायलट सत्ता के पवेलियन तक पहुंच पाते हैं या जादूगर की फिरकी में गिल्लियां उखड़वा लेंगे ये तो समय ही बताएगा लेकिन सुस्त आलाकमान ने जिस तरह ये मामला हालातो पर छोड़ दिया है उससे इन दोनों नेताओं का कद तो राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगा लेकिन दोनों कद्दावर नेताओ में से एक का कोप तो कांग्रेस को भी जरूर भुगतना दिख रहा है।

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